"केरल राज्य बनाम चंद्रमोहन्न,सुप्रीम कोर्ट,2004"
(👉 अध्यादेश 1975)
{👉अनुसूचित क्षेत्र(झारखंड राज्य)आदेश 2007}
जोहार🙏🙏🙏
(चलिए मिलकर आदिवासी समुदाय की जिम्मेदारी उठाये)
👉"converted आदिवासी एक गैर आदिवासी है"
"अनु 342"
Note down-: आदिवासी-समुदाय एक धर्मी नहीं है...एक धर्मपूर्वी है...माटी का पुजारी है...प्राकृतिक का उपासक है इसलिए धर्म का जिक्र नहीं है...ये खुद से समझने-बूझने का है...
👉अनु 342(1) के तहत राष्ट्रपति अपने सलाहकार,राज्यपाल और राज्यप्रमुखों के सलाह-मशविरा से किसी एक समूह को एसटी में शामिल करती है...या एसटी से बाहर कर सकती है...
👉👉एक भारतीय आदिवासी या भारतीय एसटी होने के संवैधानिक मापदंड निम्नलिखित है...
1-:समाजिक पिछड़ापन
2-:शैक्षणिक पिछड़ापन
👉👉अनु 342क में वर्णन कर रखा गया है...
3-: डिस्ट्रिक्ट कल्चरल
4-: टेरीटोरियल पाॅजिशन
5-:ट्रैबल ट्रेड के गुण
6-: भौगोलिक स्थिति
7-: बाहरी से बातचीत और मिलनसार का हिचकिचाहट...
👉अनु 342(2) के तहत लोकसभा/विधानसभा किसी समूह को एसटी कैटिगरी में शामिल करने/बाहर करने के लिए अपने सत्र से तीन चौथाई/दो चौथाई के बहुमत-सहमति से "बिल/विधेयक" ला सकती है...और अंतिम निर्णय के लिए राष्ट्रपति के पास भेजती है...राष्ट्रपति अनु 342(1) के मोड के तहत निर्णय जोन में जाती है...इन सब पहलुओं पर आदिवासी-समुदाय के स्वीकृति और इंकार राष्ट्रपति के लिए मायने होते है...
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👉अगर "एसटी आदेश 1950" पर एक नजर डालें...
"जो पुरखौती विश्वास और आस्था(धर्मपूर्वी) को मानता हो...विश्वास और आस्था से उत्पन्न रीति-रिवाज और परम्परा का अनुकरण करता हो...पुरखौती रूढ़ि-प्रथा(अरी-चली) से संचालित होता हो...वहीं व्यक्ति "एसटी आदेश 1950" और अनु 342 के तहत एक भारतीय एसटी है...एक भारतीय आदिवासी है...
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👉अगर आदिवासी-समुदाय की संवैधानिक वर्णन हो तो अनु 13(3)क को अनदेखा करना ही आदिवासी-समुदाय का संवैधानिक अन्याय है...
👉👉अनु 13(3)क के तहत विधियों के अंतर्गत भारत के राज्य क्षेत्रों में विधि को बल देने वाली कोई आदेश,अधिसूचना,अध्यादेश,अधिनियम,विनियम,उपनियम,उपविधि,विधि,रूढ़ि-प्रथा आता है...
👉रूढ़ि-प्रथा सिर्फ और सिर्फ आदिवासी-समुदाय के लिए है...दूसरे भारतीय समुदायों के लिए भारत सरकार इनके सिस्टम और व्यवस्था को चलाने के लिए अधिनियम बना रखे है...इनके मामलात न्यायपालिका में इनके सिविल कोड,पर्सनल लाॅ और फैमिली लाॅ के तहत ही reviews होता है...जिसको अनु 13 के तहत define करती है...
एक तरफ अनु 25,अनु 26 होती है तो दूसरी तरफ अनु 14,अनु 15,अनु 21 होती है...
👉👉आदिवासी-समुदाय के रूढ़ि-प्रथा के तहत...
1-: पुरखौती रूढ़िगत कानूनी व्यवस्था ग्राम सभा
2-: पुरखौती रूढ़िगत व्यवस्था(राजी पड़हा,मांझी परगना,पटेल,मानकी मुंडा,प्रधान,डोकलो अन्य है)...
3-: पुरखौती रूढ़िगत पत्थलगढ़ी
4-:प्रथा
5-:कस्टमरी लाॅ(अलिखित कानून)-:1-:जन्म संस्कार
2-:नामकरण संस्कार
3-:कणभेदी संस्कार
4-:विवाह संस्कार(तालाक,adoption,गुजारा-भत्ता)
5-:मृत्यु संस्कार
6-:उत्तराधिकार
जय सरना...जय सेवा...जय भीलप्रदेश...जय गोंडवाना...जय आदिवासी...
जय धरम!
जय चाला!!
जय सरना!!!
राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा युवा सभा,भारत
